आक्टा की आपात बैठक में यूजीसी के फैसले का विरोध
अग्रिम वेतनवृद्धि को वापस करने का विरोध
पीएचडी और एम.फिल की अग्रिम वेतनवृद्धि वापस लेने के आदेश पर जताई आपत्ति
इलाहाबाद विश्वविद्यालय संगठन महाविद्यालय शिक्षक संघ (आक्टा) की आपात बैठक बुधवार को अध्यक्ष प्रो. उमेश प्रताप सिंह की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक का मुख्य एजेंडा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा पीएचडी और एम.फिल की अग्रिम वेतनवृद्धि को वापस लेने के निर्णय पर चर्चा करना था।
यूजीसी के आदेश को वापस लेने की मांग
बैठक में महासचिव प्रो. संतोष कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि यूजीसी का यह निर्णय असंगत और अनुचित है, जिससे शिक्षकों को आर्थिक नुकसान होगा। आक्टा अध्यक्ष प्रो. उमेश प्रताप सिंह ने बताया कि इस आदेश को वापस लेने के लिए यूजीसी अध्यक्ष को अनुरोध पत्र भेजा गया है। उन्होंने कहा कि यदि यूजीसी इस निर्णय पर पुनर्विचार नहीं करता है, तो संगठन आगे की रणनीति तैयार करेगा।
नवनियुक्त प्राध्यापकों के लिए सदस्यता की अंतिम तिथि
बैठक में आक्टा ने यह भी निर्णय लिया कि नवनियुक्त प्राध्यापक 10 मार्च तक आक्टा की सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं। इसके लिए विशेष सदस्यता अभियान चलाया जाएगा, जिससे अधिक से अधिक शिक्षक संगठन से जुड़ सकें और अपनी आवाज बुलंद कर सकें।
बैठक में शिक्षकों की भागीदारी
इस आपात बैठक में प्रो. धीरज चौधरी, प्रो. संघ सेन सिंह, डॉ. हरिश्चंद्र यादव, डॉ. आशीष मिश्र, डॉ. शिव शंकर श्रीवास्तव, डॉ. प्रवीण, डॉ. रचना सहित कई शिक्षक उपस्थित रहे। बैठक के समापन पर धन्यवाद ज्ञापन आक्टा के उपाध्यक्ष डॉ. अखिलेश त्रिपाठी ने किया।
आगे की रणनीति पर विचार
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि यदि यूजीसी अपने आदेश को वापस नहीं लेता है, तो शिक्षक संघ आगे की कार्रवाई के लिए नई रणनीति बनाएगा। आक्टा ने विश्वविद्यालय प्रशासन से भी अनुरोध किया कि वह इस विषय में शिक्षकों का समर्थन करे और उच्च स्तर पर यूजीसी से संवाद स्थापित करे।
शिक्षकों का मानना है कि यह आदेश उनके अधिकारों का हनन है और इसे वापस लिया जाना चाहिए। आक्टा के इस विरोध के बाद अब सभी की निगाहें यूजीसी के अगले कदम पर टिकी हैं।
Post a Comment